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कोरोना काल में मसीहा बनकर उभरे एक्टर को दिया गया सम्मान, दुर्गा पूजा के पंडाल में बनी सोनू सूद की मूर्ति

मुंबई. दुर्गा पूजा पर पूरे देश में देवी मां की मूर्तियां रखी जाती हैं। लोग औरतों को देवी का रूप मानते हुए इस पूजा का आयोजन करते हैं। हालांकि इस बार दुर्गा पूजा में कुछ नया देखने को मिला है, क्योंकि इस बार के दुर्गा पूजा में औरतों के साथ-साथ पुरूषों को भी महत्व और मान सम्मान दिया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण कोलकाता में सोनू सूद की बनाई गई मूर्ति है।

कोविड 19 के दौरान गरीब, मजदूरों के लिए मसीहा बनकर उभरे एक्टर सोनू सूद को ध्यान में रखते हुए कोलकात्ता में दुर्गा पूजा के पंडाल का थीम बनाया गया है। जिसके जरिए एक्टर के कार्यो की प्रशंसा करते हुए उन्हें मूर्तियों का रूप दिया गया है। ये यूनिक थीम ये मुर्तिपलायान की कहानी बयां करती हैं।

पहला दृश्य

थीम में मजदूरों के पलायन और सोनू सूद को उनकी मदद करते हुए दिखाया गया है। इस दुर्गा पूजा पंडाल को लोग दूर-दूर से देखने आ रहे हैं। पंडाल का मुख्य आकर्षण है की इसमें पांच प्रमुख दृश्य दिखाए जाएंगें।

उत्तरप्रदेश में प्रवासी मजदूरों के पलायन के दौरान एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, यह वीडियो था एक मां और बेटे का, जिसमे मां बेटे को पैदल लेकर जा रही है बच्चा थक जाता है तो वह उसे सूटकेस पर लेटा लेती हैंय़ सूटकेस को रस्सी से बांधकर वह खींचती हुई पैदल चलती है यह दृश्य भी दुर्गा पूजा पंडाल की थीम का हिस्सा है।

दूसरा दृश्य

साथ ही पंडाल की थीम में एक दृश्य दिखाया गया है कि एक लड़की साइकिल चला रही है, वह अपने पिता के साथ घर जाने के लिए साइकिल से निकली और इस दौरान उन्हें कैसे सैकड़ों मील साइकल चलाकर यात्रा की, ये भी दिखाया गया है।

तीसरा दृश्य

महाराष्ट्र की वह खबर हर किसी को याद होगी, जब सैकड़ों मील पैदल चलकर मज़दूर थक गए और रेलवे ट्रैक पर सो गए, ट्रेन की चपेट में आने सेकई मज़दूरों की मौत हो गई थी। इस थीम में यह दृश्य भी दिखाया गया है। एक ट्रैक पर ट्रेन आती हुई नजर आ रही है और ट्रैक पर मज़दूर बेधड़क सो रहे हैं।

बोलेपुर के कारीगरों ने बनाई हैं मूर्तियां

बता दें कि ये सभी मॉडल बोलेपुर में कारीगरों द्वारा बनाए गए हैं। कोलकाता स्थित थीम डिज़ाइनर, कलाकार स्वप्न चक्रवर्ती ने बताया कि वह जून में COVID-19 पॉजिटिव आई थीं। क्वारंटीन रहने के दौरान, उन्होंने समाचार देखने के अलावा और कुछ नहीं किया, इस दौरान उन्होंने देखा कि सैकड़ों मील की पैदलयात्रा कर रहे मज़दूर कितने दर्द से गुजर रहे थे, उनका दर्द सोनू सूद ने समझा और उनकी मदद के लिए आगे आए। वह सोनू से बहुत ज्यादा प्रभावित हुए और इसे अपनी मुर्तियों में उतारने की कोशिश की।

वहीं क्लब के सचिव रूमन चंदा ने बताया, ‘हम एक ऐसा विषय बनाना चाहते थे जो आम लोगों कीभावनाओं को जाहिर करे। हमने जितनी भी थीम सोची उनमें से प्रवासी मज़दूरों का संकट और जिस तरहसे सोनु सुद ने उनकी मदद की, यह विषय सबसे ज्यादा मानवीय था।


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