श्रमिकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से कुछ राज्यों में बैकिंग, परिवहन सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित

नयी दिल्ली. केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ श्रमिक संगठनों की दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन कुछ राज्यों में मंगलवार को बैकिंग और परिवहन सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हुईं. केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने दो दिन की हड़ताल का आह्वान किया था. मंच ने मंगलवार को दावा किया कि हड़ताल को श्रमिकों की लामबंदी के माध्यम से अच्छी प्रतिक्रिया मिली.
मंच के अनुसार, इस हड़ताल में सार्वजानिक क्षेत्र के कई बैंक कर्मचारियों ने भी भाग लिया.

बैंक यूनियनों ने इस दौरान 2021-22 के बजट में प्रस्तावित सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण के सरकार के कदम का विरोध किया. उन्होंने जमा पर ब्याज दर में वृद्धि और सेवा शुल्क में कमी की भी मांग की. खबरों के अनुसार, केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सामान्य जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ.

श्रमिक संगठन एटक की महासचिव अमरजीत कौर ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘लगभग सभी क्षेत्रों के कर्मचारी एवं कामगार इस हड़ताल का हिस्सा बने हैं और ग्रामीण इलाकों में भी इसे खासा समर्थन मिला है. उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के कर्मचारी भी इसमें शामिल हुए हैं.’’ संयुक्त मंच ने एक बयान जारी कर संगठित और असंगठित क्षेत्रों, सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र और निजी प्रतिष्ठानों, मझोले, लघु और सूक्ष्म उद्यमों के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी कामकाजी लोगों के श्रमिकों की ‘इस दो दिन की हड़ताल की शानदार सफलता’ के लिए सराहना भी की.

बयान में कहा गया, ’’सभी बाधाओं, आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम, डराने-धमकाने और कुछ मामलों में पुलिस की मनमानी तथा केरल में उच्च न्यायालय के आदेश समेत बीपीसीएल और सरकारी कर्मचारियों के लिए हड़ताल पर रोक लगाने के बावजूद हड़ताल में भाग लेने वालों की संख्या 20 करोड़ को पार कर गई.’’ इसके अलावा हरियाणा में सड़क परिवहन र्किमयों ने सोमवार से डिपो पर धरना देकर अपनी हड़ताल शुरू कर दी.

हड़ताल की आवाज संसद के दोनों सदनों में पहुंची. राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल से जुड़े मुद्दे उठाए और सरकार से उनकी मांगों पर गौर करने और कदम उठाने का आग्रह किया. इस बीच राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने शून्यकाल के दौरान कुछ विपक्षी सदस्यों द्वारा श्रम संगठनों की 12 मांगों पर चर्चा करने के लिए नोटिस को स्वीकार नहीं किया.

हालांकि, नायडू ने तीन सदस्यों को राष्ट्रव्यापी हड़ताल से संबंधित मामले का संक्षेप में उल्लेख करने की अनुमति दी.
इस हड़ताल में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी जैसी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भाग लिया. उन्होंने हड़ताल के जरिये महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के लिए बजट आवंटन बढ़ाने और संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने समेत श्रम सुधारों और निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है.

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