चिकित्सक भगवान के प्रतिरूप और मितानिनें जीवन बचाने वाली देवी- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

अन्य राज्यों से आने वालों को कोरेंटीन सेंटर में ठहराना और कोरोना जांच कराना जरुरी

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ राज्य में मितानिनों एवं ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा कोरोना संक्रमित लोगों के जीवन रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है .

मुख्यमंत्री ने कहा है कि चिकित्सक को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है. राज्य में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की रोकथाम और संक्रमित लोगों की जीवन रक्षा में राज्य की मितानिन बहनें देवी के रूप में काम कर रही हैं.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सरगुजा और बिलासपुर संभाग के विभिन्न ब्लॉकों के ग्रामीण इलाको में कोरोना संक्रमण की स्थिति और संक्रमितों के उपचार एवं उनके स्वास्थ्य के बारे में मितानिनों एवं ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से चर्चा कर रहे थे. इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आगे कहा कि आप सब की सेवा का ही परिणाम है कि राज्य में कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने लगी है. कोरोना के गंभीर स्थिति वाले मरीजों की संख्या में कमी आई है और मरीजों की रिकवरी भी तेजी से होने लगी है. राज्य में अस्पताल, इलाज ,दवा ,ऑक्सीजन बेड , आईसीयू , वेंटीलेटर आदि को लेकर अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही है. शहरों विशेषकर राजधानी रायपुर एवं बिलासपुर में कोरोना के गंभीर स्थिति वाले मरीजों का दबाव कम हुआ है. उन्होंने कहा कि कोरोना लक्षण वाले मरीजों की पहचान कर उन्हें दवाओं का सेवन शुरू कराने से ही यह संभव हो सका है.

अन्य राज्यों से आने वालों को कोरेंटीन सेंटर में ठहराना और कोरोना जांच कराना जरुरी
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ राज्य में अन्य राज्यों से आने वाले लोगों, प्रवासी श्रमिकों को अनिवार्य रूप से क्वारेंटिंन सेंटर में ठहराने और उनका करोना टेस्ट कराने के निर्देश दिए हैं .

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में अन्य राज्यों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों एवं लोगों के संक्रमित होने की जानकारी मिल रही है . राज्य में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए यह जरूरी है , कि अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को गांव, घर- परिवार के बीच जाने देने के बजाय उन्हें गांव के बाहर स्थापित क्वॉरेंटीन सेंटर में कुछ दिनों के लिए एहतियात के तौर पर अनिवार्य रूप से ठहराया जाए और उनका कोरोना टेस्ट भी कराया जाए.

कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव होने पर ही उन्हें गांव एवं घर परिवार में जाने की अनुमति दी जाए. यह इसलिए जरूरी है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर हम गांव और ग्रामीणों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close