अदालत ने पादरी और नन को जमानत दी, अभया मामले में सुनाई गयी थी उम्रकैद की सजा

कोच्चि. केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक कैथलिक पादरी और एक नन को जमानत दे दी जिन्हें 21 वर्षीय सिस्टर अभया की हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गयी थी. सिस्टर अभया का शव 1992 में कोट्टायम में एक कॉन्वेंट के कुएं में मिला था. न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति सी जयचंद्रन की पीठ ने फादर थॉमस कुट्टूर और सिस्टर सेफी को सुनाई गयी सजा की तामील को निलंबित कर दिया और उन्हें पांच-पांच लाख रुपये का मुचलका जमा करने पर जमानत दे दी.

पीठ ने कहा, ‘‘बचाव पक्ष ने जिन सबूतों की ओर इशारा किया है तथा अभियोजन पक्ष ने प्रभावी तरीके से जिन्हें चुनौती नहीं दी है, प्रथम दृष्टया उन्हें देखने पर हम अंतरिम उपाय के रूप में दोनों आरोपियों को रिहा करने के अलावा कुछ नहीं कर सकते और उनकी सजा को अपील के निस्तारण तक निलंबित किया जाता है.’’ मामले के अनेक पहलुओं पर अभियोजन पक्ष की ओर से स्पष्टीकरण नहीं आने के मद्देनजर अदालत ने यह टिप्पणी की.

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