ईद पर बच्चों को विशेष पोषाक पहनने के लिए बाध्य करने वाली प्रधानाचार्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

प्रयागराज. ईद के मौके पर छात्रों को सलवार-कुर्ता और जालीदर टोपी व छात्राओं को सलवार-कुर्ता और दुपट्टा पहनकर हैपी ईद कहते हुए 20 सेकेंड का वीडियो बनाने के लिए कथित तौर पर बाध्य करने के आरोप में प्रयागराज शहर के एक स्कूल की प्रधानाचार्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.

शहर के कीडगंज थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री लाल मणि तिवारी का आरोप है कि झूंसी के न्याय नगर पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. बुशरा मुस्तफा द्वारा दो मई को छात्रों से सलवार-कुर्ता और जालीदार टोपी व छात्राओं से सलवार कुर्ता और दुपट्टा पहनकर हैपी ईद कहते हुए 20 सेकेंड का वीडियो बनाने को कहा गया.

लाल मणि तिवारी द्वारा दी गई तहरीर के मुताबिक, ‘‘बुशरा मुस्तफा एक सांप्रदायिक सोच की मुस्लिम महिला हैं और उनके द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए जानबूझकर एक साजिश के तहत हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने, शिक्षा संस्थानों का माहौल खराब करने, बच्चों के बीच धार्मिक भेदभाव पैदा करने की कोशिश की गई.’’ उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल की ओर से बच्चों को भेजे गए संदेश में ईद त्योहार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई और दो मई को स्कूल में ईद के लिए आयोजित कार्यक्रम में नर्सरी से यूकेजी तक के बच्चों को ईद की पोशाक पहनकर वीडियो बनाने को कहा गया.

वहीं कक्षा एक से तीन तक के बच्चों को ईद कार्ड बनाने, कक्षा चार और पांच के बच्चों को रंग बिरंगे ईदी थैले बनाने और कक्षा छह से नौ तक के बच्चों को पेपर लालटेन बनाने को कहा गया था. लाल मणि तिवारी का आरोप है कि नर्सरी से यूकेजी के अबोध बच्चों को ईद की पोशाक पहनने और वीडियो बनाने पर कुछ नंबर अधिक देने की बात करना किसी धर्म विशेष के प्रति इन बच्चों का आकर्षण बढ़ाने की कोशिश है, यह धर्म परिवर्तन की दिशा में उठाया गया कदम है.

तिवारी ने कहा कि तीन मई को ईद के साथ हिंदुओं का भी एक प्रमुख त्योहार अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती थी, लेकिन प्रधानाचार्या द्वारा इनसे संबंधित कोई गतिविधि विद्यार्थियों से नहीं कराई गई. कीडगंज थाना के प्रभारी राममूर्ति यादव ने बताया कि यह मामला झूंसी थाना अंतर्गत आता है, इसलिए इस मामले की जांच झूंसी थाना करेगा. अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.

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