जम्मू-कश्मीर में 2019 से मारे गए 14 हिंदुओं में से चार कश्मीरी पंडित : सरकार

नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि जम्मू-कश्मीर में 2019 से अब तक आतंकवादियों के हाथों चार कश्मीरी पंडित सहित 14 हिंदू मारे गए. राय ने विभिन्न सवालों के लिखित जवाब में उच्च सदन को बताया कि पिछले पांच साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों ने अल्पसंख्यक समुदायों के 34 लोगों की जान ले ली. इनमें 2021 में मारे गए 11 लोग शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद प्रधानमंत्री पैकेज के तहत मुहैया कराई गई नौकरियों को लेने के लिए 2105 प्रवासी कश्मीर घाटी वापस लौट आए हैं. राय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों ने 2019 से अब तक चार कश्मीरी पंडितों और 10 अन्य हिंदुओं की भी जान ले ली. उन्होंने कहा कि सरकार ने घाटी में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए हैं और आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

राय ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2017 से अब तक घुसपैठ की 502 घटनाएं हुई हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री विकास पैकेज, 2015 का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना के तहत कश्मीरी प्रवासियों के लिए 3,000 नौकरियों का सृजन किया गया है. उन्होंने कहा कि 2,828 प्रवासियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो गई है.

राज्यसभा में सरकार ने दिया कश्मीरी प्रवासियों की संपत्ति लौटाने का आश्वासन

सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि अत्याचार के कारण घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडितों में से 610 लोगों की संपत्ति उन्हें वापस की गयी है और अन्य ऐसे लोगों की संपत्ति लौटाने के लिए वह प्रयासरत है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी.

राय ने कहा कि जम्मू कश्मीर के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी प्रवासी लोगों की अचल संपत्ति के कानूनी अभिरक्षक होते हैं और जम्मू कश्मीर सरकार ने ऐसे लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए पिछले साल एक पोर्टल की शुरूआत की है जो अत्याचार के कारण घाटी छोड़ने के लिए विवश हुए और जिनकी संपत्ति जबरन ले ली गई.

राय ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसे लोगों की संपत्ति वापस लौटाने के लिए सक्षम एवं पूरी तरह से प्रयासरत है और अब तक पोर्टल पर आवेदन करने वाले 610 आवेदकों की संपत्ति वापस की गयी है. जम्मू कश्मीर में लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए सरकार के विभिन्न कदमों का जिक्र करते हुए राय ने कहा कि जम्मू कश्मीर के औद्योगिक विकास के लिए 51,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं और इससे केंद्रशासित प्रदेश में 4.5 लाख युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है.

राय ने कहा सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के सुखद परिणाम सामने आए हैं और दुर्गम क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण में तेजी आने से आवागमन भी सुगम हुआ है. उन्होंने कहा कि 2019 तक वहां प्रतिदिन औसतन 6.54 किलोमीटर सड़क बन रही थी है लेकिन अब प्रतिदिन औसतन 20.68 किलोमीटर सड़क बन रही है. उन्होंने कहा कि वहां एक हजार तक की आबादी वाली बस्तियां सड़कों से जुड़ गई हैं और 500 तक की आबादी वाली बस्तियों को 2023 तक सड़कों से जोड़ देने का प्रयास है.

उन्होंने कहा कि काजीगुंद-बनिहाल सुरंग बन जाने से श्रीनगर और जम्मू के बीच की दूरी तय करने में आसानी होगी और इस यात्रा में पहले जहां 10 घंटे लगते थे, वहीं अब यह यात्रा पांच घंटे 50 मिनट में पूरी होगी. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर विकास की राह पर है, वहां 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है तथा वहां आईआईटी एवं आईआईएम जैसे संस्थान भी स्थापित किए गए हैं.

राय ने कहा कि 2019 से अब तक राज्य में लगभग 26,303 पदों की पहचान की गई है और भर्ती की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा कि सरकार उन प्रवासी कश्मीरियों को नौकरी देने के लिए तैयार है जो वहां वापस बसना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर सरकार ने 2020-21 में 841 और 2021-22 में 1,264 लोगों को नौकरी दी है. जम्मू कश्मीर के लिए 2015 में घोषित करीब 58,400 करोड़ रुपये के विकास पैकेज के बारे में राय ने कहा कि परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है और कई परियोजनाएं पूरी हो गई हैं. उन्होंने कहा कि जल्दी ही बाकी परियोजनाओं को पूरा कर लिया जाएगा.

घाटी छोड़ने वाले 610 कश्मीरी पंडितों की संपत्ति वापस की गयी : सरकार

सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि अत्याचार के कारण घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडितों में से 610 लोगों की संपत्ति उन्हें वापस की गयी है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी.

राय ने कहा कि जम्मू कश्मीर के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी प्रवासी लोगों की अचल संपत्ति के कानूनी अभिरक्षक होते हैं और जम्मू कश्मीर सरकार ने ऐसे लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए पिछले साल एक पोर्टल की शुरूआत की है जो अत्याचार के कारण घाटी छोड़ने के लिए विवश हुए और जिनकी संपत्ति जबरन ले ली गई. राय ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसे लोगों की संपत्ति वापस लौटाने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है और अब तक पोर्टल पर आवेदन करने वाले 610 आवेदकों की संपत्ति वापस की गयी है.

जम्मू कश्मीर में लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए सरकार के विभिन्न कदमों का जिक्र करते हुए राय ने कहा कि जम्मू कश्मीर के औद्योगिक विकास के लिए 51,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं और इससे केंद्रशासित प्रदेश में 4.5 लाख युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है.

राय ने कहा सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के सुखद परिणाम सामने आए हैं और दुर्गम क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण में तेजी आने से आवागमन भी सुगम हुआ है. उन्होंने कहा कि 2019 तक वहां प्रतिदिन औसतन 6.54 किलोमीटर सड़क बन रही थी है लेकिन अब प्रतिदिन औसतन 20.68 किलोमीटर सड़क बन रही है.

उन्होंने कहा कि वहां एक हजार तक की आबादी वाली बस्तियां सड़कों से जुड़ गई हैं और 500 तक की आबादी वाली बस्तियों को 2023 तक सड़कों से जोड़ देने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि काजीगुंद-बनिहाल सुरंग बन जाने से श्रीनगर और जम्मू के बीच की दूरी तय करने में आसानी होगी और इस यात्रा में पहले जहां 10 घंटे लगते थे, वहीं अब यह यात्रा पांच घंटे 50 मिनट में पूरी होगी.

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