ज्ञानवापी सर्वे : अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा को अदालत ने हटाया

वाराणसी/मुंबई. वाराणसी की एक अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में वीडियोग्राफी-सर्वे के लिये एडवोकेट कमिश्नर (अधिवक्ता आयुक्त) नियुक्त किये गये अजय मिश्रा को उनके एक सहयोगी द्वारा मीडिया में खबरें लीक करने के आरोप में मंगलवार को पद से हटा दिया.
सहायक एडवोकेट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा को लापरवाही के आरोप में पद से हटा दिया है.

वहीं, अधिवक्ता आयुक्त पद से हटाए गए अजय मिश्रा ने अपनी सफाई में कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है और जो भी हुआ, उन्हें उसकी उम्मीद नहीं थी. उन्होंने कहा, “मैंने जिस फोटोग्राफर को रखा, उसने धोखा दिया है. मैंने जिस पर विश्वास किया, उससे मुझे धोखा मिला. इसमें मैं क्या कर सकता हूं.” इस सवाल पर विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने उन पर असहयोग का आरोप लगाया है, मिश्रा ने कहा, “हो सकता है कि उनको लगा होगा. मेरे हिसाब से मैंने कोई असहयोग नहीं किया.”

मिश्रा ने कहा, “आयोग की कार्यवाही विशाल सिंह के ही निर्देशन में हुई. अब विशाल जी का हृदय ही जानेगा और मेरा हृदय जानेगा कि मैंने उनका सहयोग किया है या नहीं.” दरअसल, ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे के काम के लिए अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह पर आयोग की कार्यवाही में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया था.

विशाल सिंह ने अदालत के सामने कहा, “अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा ने एक निजी कैमरामैन आर. पी. सिंह को वीडियोग्राफी सर्वे के लिए रखा था जो मीडिया में लगातार गलत बयान दे रहे थे. इसीलिए सिंह को कल आयोग की कार्यवाही से अलग रखा गया था.” जब कोई अधिवक्ता एडवोकेट कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया जाता है तब उसकी स्थिति एक लोक सेवक की होती है और उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह कमीशन की कार्यवाही का संपादन पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से करेगा जबकि अजय मिश्रा ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन बेहद गैर जिम्मेदाराना तरीके से किया.

अदालत ने विशाल सिंह के प्रार्थना पत्र को निस्तारित करते हुए अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश दिए. अदालत ने कहा, “विवेचना से यह स्पष्ट हो चुका है कि अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा द्वारा जो निजी कैमरामैन रखा गया था उसने मीडिया में बराबर बाइट दी जो कि न्यायिक मर्यादा के सर्वाधिक प्रतिकूल है.” अदालत ने साथ ही कहा कि विशाल सिंह ही 12 मई के बाद की आयोग की पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट खुद दाखिल करेंगे और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह, विशाल सिंह के निर्देशन में ही काम करेंगे और स्वतंत्र रूप से कुछ भी नहीं कर सकेंगे.

अदालत ने सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने के लिये दो और दिन का समय दिया है क्योंकि इलाके के नक्शे बनाने में कुछ समय लग रहा है. ऐसे में संभव है कि सर्वे रिपोर्ट 19 मई को अदालत में पेश की जाए. पहले यह रिपोर्ट 17 मई को ही पेश की जानी थी.
मुस्लिम पक्ष अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा पर पहले से ही पक्षपात का आरोप लगाता रहा है. उसने गत सात मई को सर्वे के दूसरे ही दिन मिश्रा पर आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की अर्जी अदालत में दी थी. हालांकि अदालत ने इसे नामंजूर करते हुए मिश्रा के सहयोग के लिये एक विशेष और एक सहायक एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की थी.

गौरतलब है कि ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कार्य सोमवार को पूरा किया गया था. सर्वे के अंतिम दिन हिन्दू पक्ष ने दावा किया था कि मस्जिद के वजूखाने में एक शिवलिंग मिला है. मगर मुस्लिम पक्ष ने यह कहते हुए इस दावे को गलत बताया था कि मुगल काल की तमाम मस्जिदों में वजूखाने के ताल में पानी भरने के लिये नीचे एक फौव्वारा लगाया जाता था और जिस पत्थर को शिवलिंग बताया जा रहा है, वह फौव्वारे का ही एक हिस्सा है.

हिंदू-मुस्लिम सुनिश्चित करें कि लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश नहीं हो : पाटिल
महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने मंगलवार को कहा कि हिंदू और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धर्म के आधार लोगों को बांटने की कोशिश नहीं की जाए. उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर सर्वेक्षण और वहां स्थिति तनावपूर्ण होने की रिपोर्ट के संबंध में संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए पाटिल ने यह बात कही.

मंत्री ने संवादाताओं से कहा कि यह मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है. मंत्री ने कहा, ‘‘शीर्ष अदालत इस मामले में निर्णय लेगी. हिंदू और मुस्लिम समुदाय के भाइयों और बहनों को यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि (महाराष्ट्र में) धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश ना हो.’’ उन्होंने कहा कि राज्य का माहौल निश्चित रूप से शांतिपूर्ण रखा जाना चाहिए. पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस अपना काम कर रही है और वह स्थिति की निगरानी कर रही है.

सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और विवादित पोस्ट किये जाने से संबंधित सवाल पर पाटिल ने उपयोगकर्ताओं से कहा कि वे संयम दिखाएं. पाटिल ने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कहूंगा कि प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, लेकिन सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं को संयम दिखाना चाहिए या यहां कोई नियामक प्रणाली होनी चाहिए.’’

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