धार की भोजशाला पर हिंदुओं का दावा, अदालत ने सरकार व ASI से मांगा जवाब

इंदौर. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक धार शहर की भोजशाला पर हिंदू पक्ष के दावे को लेकर बुधवार को केंद्र और राज्य की सरकारों के साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया. इसके साथ ही भोजशाला का पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है.

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विवेक रुसिया और न्यायमूर्ति अमरनाथ केशरवानी ने “हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस” नामक संगठन और हिन्दू पक्ष के अन्य लोगों की ओर से दायर दो जनहित याचिकाओं को सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए नोटिस जारी किए.
अदालत ने धार के भोजशाला परिसर की मस्जिद से जुड़ी मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

गौरतलब है कि भोजशाला, केंद्र सरकार के अधीन एएसआई का संरक्षित स्मारक है. हिंदुओं का मानना है कि भोजशाला वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है, जबकि मुस्लिम समुदाय इस जगह को कमाल मौला की मस्जिद बताता है. एएसआई की बरसों से जारी व्यवस्था के मुताबिक, हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है.

याचिकाकर्ता के वकील हरिशंकर जैन ने संवाददाताओं को बताया कि भोजशाला के ऐतिहासिक तथ्य तथा तस्वीरें उच्च न्यायालय के सामने पेश करके एएसआई की इस व्यवस्था को संविधान के अलग-अलग प्रावधानों के तहत चुनौती दी गई है. उन्होंने बताया कि याचिकाओं में गुहार लगाई गई है कि हिंदुओं को समूचे भोजशाला परिसर में साल भर पूजा-पाठ का धार्मिक अधिकार दिया जाए और इसमें हर शुक्रवार नमाज अदा करने की मुस्लिमों को दी गयी अनुमति वापस ली जाए.

जैन ने बताया कि याचिकाओं में यह गुहार भी की गई है कि लंदन के एक संग्रहालय में रखी वाग्देवी की प्रतिमा को भारत लाकर इसे हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के मुताबिक भोजशाला में फिर से स्थापित किया जाए. याचिकाओं में कहा गया है कि धार के राजा भोज ने इस पवित्र प्रतिमा को भोजशाला परिसर में 1034 ईस्वी में स्थापित किया था और भारत पर अपने शासन के दौरान अंग्रेज इसे 1875 में लंदन ले गए थे.

दोनों याचिकाओं पर 27 जून को अगली सुनवाई हो सकती है. बहरहाल, भोजशाला का विवाद नया नहीं है और धार के पुलिस-प्रशासन को इस शहर में तब-तब सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़ते हैं, जब-जब सरस्वती पूजा (वसंत पंचमी) का पर्व शुक्रवार को पड़ता है.

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