अगर टाटा एयर इंडिया को नहीं चला पाया, तो भारत में उसे कोई और नहीं चला सकता: अमीरात अध्यक्ष

दोहा. विमान सेवा देने वाली अमीरात के अध्यक्ष टिम क्लार्क ने कहा कि भारत में किसी एयरलाइन के लिए परिचालन करना आसान नहीं है और अगर टाटा समूह एयर इंडिया नहीं चला पाया, तो देश में कोई भी उसे नहीं चला सकता. क्लार्क ने सोमवार को कहा, ‘‘एयर इंडिया को यूनाइटेड एयरलाइंस जितना बड़ा होना चाहिए. इसे अपने घरेलू बाजार के साथ ही विदेशों में प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारत में होने वाली आर्थिक गतिविधियों के स्तर के कारण इतना बड़ा तो होना ही चाहिए. ये सोने की खान है.’’ एयर इंडिया के बेड़े में फिलहाल लगभग 128 विमान हैं, जबकि शिकागो स्थित यूनाइटेड एयरलाइंस के पास 860 विमान हैं.

क्लार्क ने यहां इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) की 78वीं वार्षिक आम बैठक के मौके पर कहा, ‘‘आप (भारत) के पास प्रवासी भारतीयों की एक अरब आबादी है, जो इतनी बड़ी है और हर समय बढ़ रही है कि एयर इंडिया को दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों में एक होना चाहिए.’’ टाटा समूह ने पिछले साल आठ अक्टूबर को एयरलाइन के लिए सफलतापूर्वक बोली जीतने के बाद 27 जनवरी को घाटे में चल रही और कर्ज में डूबी एयर इंडिया का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया.

क्लार्क ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि एयर इंडिया के लिए सबसे अच्छी बात यह हो सकती थी कि टाटा इसे अपने हाथ में ले ले. इस कमरे में शायद मैं अकेला हूं, जिसने उस समय एयर इंडिया से उड़ान भरी थी, जब टाटा एयर इंडिया चला रही थी और यह उसके स्वामित्व में थी. यह एक अच्छी एयरलाइन थी.’’ उन्होंने कहा कि दशकों से एयर इंडिया अंतरराष्ट्रीय पटल पर छोटी इकाई बना हुआ है. भारत के अंतरराष्ट्रीय यात्री बाजार में अमीरात जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों का वर्चस्व है, जो यूएई के दो प्रमुख एयरलाइन में से एक है.

एअर इंडिया को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत बनाने की सरकार की सोच सराहनीय: लुफ्थांसा सीईओ
लुफ्थांसा समूह के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कार्स्टन स्पोर ने कहा है कि भारतीय अंतरराष्ट्रीय यात्री बाजार में अधिकांश वृद्धि खाड़ी क्षेत्र की एयरलाइंस की वजह से रही है और उनका समूह एअर इंडिया को अपनी बाजार हिस्सेदारी दोबारा हासिल करने के लिए एक मजबूत इकाई बनाने के भारत सरकार के विचार की सराहना करता है.

भारत के अंतरराष्ट्रीय यात्री बाजार में अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस का दबदबा है जिनमें मुख्य रूप से अमीरात्स और कतर एयरवेज जैसे खाड़ी क्षेत्र वाली एयरलाइन शामिल हैं. मसलन, अमीरात्स एयरलाइन दुबई को मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोच्चि, कोलकाता, अहमदाबाद और तिरुवनंतपुरम से जोड़ने वाली 170 उड़ानों का संचालन करती है. टाटा समूह ने घाटे में चल रही एअर इंडिया के लिए पिछले साल आठ अक्टूबर को सफलतापूर्वक बोली लगाई थी. टाटा समूह ने इस साल 27 जनवरी को इस एयरलाइन का परिचालन एवं नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था.

यह पूछे जाने पर कि एअर इंडिया के टाटा समूह के मातहत आने के बाद लुफ्थांसा के भारत परिचालन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, स्पोर ने यहां संवाददाताओं से कहा, “भारतीय विमानन कंपनियों के लिए पहले की तुलना में भारतीय बाजार का एक बड़ा हिस्सा लेने का अवसर है. ईमानदारी से कहूं तो इस बाजार में अधिकांश वृद्धि खाड़ी स्थित एयरलाइंस की वजह से रही है. इस लिहाज से मैं एअर इंडिया को एक मजबूत खिलाड़ी बनाने के लिए भारत सरकार के विचार की सराहना करता हूं. हमें उम्मीद है कि हमारी साझेदार एअर इंडिया उन परिस्थितियों का फायदा उठाएगी.” जर्मनी का लुफ्थांसा समूह स्विस, लुफ्थांसा और आॅस्ट्रियन एयरलाइंस सहित विभिन्न यूरोपीय एयरलाइन ब्रांड का संचालन करता है.

यह पूछे जाने पर कि लुफ्थांसा समूह भारत में किस तरह की साझेदारी की तलाश में है, उन्होंने कहा, “हमारा साझेदार एअर इंडिया है, यहां स्टार एलायंस में भी शामिल है. हम बहुत करीब से देख रहे हैं कि विस्तार और अन्य एयरलाइंस के साथ क्या हो रहा है.” स्टार एलायंस 27 एयरलाइंस का एक वैश्विक समूह है जिसमें यूनाइटेड एयरलाइंस, लुफ्थांसा ग्रुप, एयर कनाडा आदि शामिल हैं.

स्पोर ने इस बात पर खुशी जताई कि भारत ने कोविड काल में शुरू की गई ‘एयर बबल’ व्यवस्था को अब खत्म कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत के लिए प्रति सप्ताह 42 उड़ानें संचालित कर रहे हैं और हम महामारी से पहले की 56 साप्ताहिक उड़ानों तक जल्द पहुंचना चाहते हैं.’’ उन्होंने कहा कि भारत से बाहर और भारत जाने के लिए सीटों की मांग काफी अधिक है.

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