हरित रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे भारत, डेनमार्क

कोपेनहेगन. भारत और डेनमार्क हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और अपशिष्ट जल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ हरित रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर मंगलवार को सहमत हुए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडेरिक्सेन के साथ बातचीत के बाद यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारी चर्चा के दौरान, हमने हरित रणनीतिक साझेदारी के लिए संयुक्त कार्य योजना की समीक्षा की. मुझे खुशी है कि विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, विशेष रूप से अक्षय ऊर्जा, स्वास्थ्य, बंदरगाह, जहाजरानी, चक्रीय अर्थव्यवस्था और जल प्रबंधन के क्षेत्रों में.’’ द्विपक्षीय वार्ता के बाद हरित शिंिपग, पशुपालन एवं डेयरी, जल प्रबंधन, ऊर्जा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों को लेकर कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.

यहां जारी एक संयुक्त बयान में, दोनों प्रधानमंत्रियों ने समग्र और सतत दृष्टिकोण के माध्यम से वर्तमान और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए सुरक्षित जल के क्षेत्र में मौजूदा सहयोग को और गहरा एवं विस्तारित करने के दोनों देशों के इरादे का स्वागत किया.
इसमें कहा गया, ‘‘वे मौजूदा सहयोग को बढ़ाने और वाराणसी में स्वच्छ नदी जल को लेकर एक स्मार्ट प्रयोगशाला और जल संसाधन प्रबंधन पर एक उत्कृष्टता केंद्र सहित नयी पहल शुरू करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय और डेनमार्क के पर्यावरण मंत्रालय के बीच एक व्यापक-आधारित ढांचे के रूप में एक सहमतिपत्र पर शीघ्र हस्ताक्षर करने के लिए उत्सुक हैं.’’

दोनों प्रधानमंत्रियों ने हरित नौवहन पर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना पर आशय पत्र का स्वागत किया, जो द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को और मजबूत करेगा. दोनों नेताओं ने डेयरी पर उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के आशय की संयुक्त घोषणा द्वारा कृषि पर सहयोग का विस्तार करने पर भी सहमति व्यक्त की. भारत और डेनमार्क ने भी रोगाणुरोधी प्रतिरोध के क्षेत्र में अपने निरंतर सहयोग की पुष्टि की.
संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत ने मिशन पार्टनर के रूप में इंटरनेशनल सेंटर फॉर एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस सॉल्यूशंस (आईसीएआरएस) में शामिल होने के डेनमार्क के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है.

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने साक्ष्य-आधारित डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार के लिए भारत के निमंत्रण पर वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य भागीदारी में डेनमार्क के शामिल होने की पुष्टि की. मोदी और फ्रेडेरिक्सेन ने वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से दो डिग्री से नीचे रखने के लिए त्वरित जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता पर सीओपी26 में अंतर्राष्ट्रीय समझौते और तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री तक सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने का का स्वागत किया.

संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘‘दोनों पक्षों ने हरित रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से – महत्वाकांक्षी हरित ऊर्जा बदलाव को आगे बढ़ाने में वैश्विक नेतृत्व और ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा दोनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए इसे प्राप्त करने के मार्ग का प्रदर्शन करने की आकांक्षाओं की पुष्टि की.’’ प्रधानमंत्री मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘डेनमार्क के साथ भारत की हरित रणनीतिक साझेदारी को बहुत महत्व दिया जाता है.

प्रधानमंत्री फ्रेडेरिक्सेन और मैंने चर्चा की कि हम इस साझेदारी को और अधिक प्रभावी कैसे बना सकते हैं. हमने अक्षय ऊर्जा, बंदरगाह, जहाजरानी, ??जल प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा की.’’ फ्रेडेरिक्सेन ने 2030 तक उत्सर्जन को 70 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए डेनमार्क में जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने तेजी लाने और डेनमार्क में नवीकरणीय ऊर्जा के परिनियोजन के लिए डेनमार्क की प्रतिबद्धता पर जोर दिया.

समावेशिता, सांस्कृतिक विविधता भारतीय समुदाय की शक्ति है: डेनमार्क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि यह “समावेशिता और सांस्कृतिक विविधता” है जो भारतीय समुदाय को हर पल जीवंत महसूस करने की शक्ति देती है तथा ये मूल्य हजारों वर्षों से भारतीयों के भीतर विकसित हुए हैं. नॉर्डिक राष्ट्र की अपनी यात्रा के दौरान डेनमार्क में बसे भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि सभी भारतीय लोग राष्ट्र की रक्षा के लिए एक साथ खड़े होते हैं और राष्ट्र निर्माण में हाथ मिलाते हैं.

मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “समावेशिता और सांस्कृतिक विविधता भारतीय समुदाय की शक्ति है, जो हम सभी को हर पल जीवंत महसूस कराती है. हजारों वर्षों के समय ने हमारे भीतर इन मूल्यों को विकसित किया है.” आगे की पंक्ति में बैठीं डेनमार्क की अपनी समकक्ष मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ सभागार में ‘मोदी, मोदी’ और ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के नारों के बीच, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कोई भारतीय व्यक्ति दुनिया में जहां भी जाता है, ईमानदारी से अपनी कर्मभूमि, उस देश के लिए के लिए योगदान देता है.
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन का आज यहां होना भारतीयों के प्रति उनके प्रेम और सम्मान का प्रमाण है.”

मोदी ने डेनिश प्रधानमंत्री के 18वीं सदी के आधिकारिक आवास पर उनसे मुलाकात की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपनी डेनिश समकक्ष मेट्टे फ्रेडेरिक्सेन से उनके 18वीं सदी के आधिकारिक आवास मारिनबोर्ग पर मुलाकात की, जो एक पहाड़ी पर स्थित है और चारों ओर से घास के मैदान, हरी-भरी वादियों तथा झीलों से घिरा हुआ है. मोदी ने ट्विटर पर कहा, ‘‘मारिनबोर्ग ने प्रधानमंत्री फ्रेडेरिक्सेन के साथ सार्थक बातचीत करने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया. हमने भारत-डेनमार्क संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए व्यापक चर्चा की. ’’ अपनी डेनिश समकक्ष के साथ प्रधानमंत्री मोदी 18वीं सदी के भवन के चारों ओर स्थित घास के मैदान पर भी टहले.

मारिनबोर्ग में डेनिश प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक आवास में मोदी को घूमाया, जिन्होंने वहां ओडिशा का एक पट्टचित्र लगा देखा, जो राम दरबार का चित्रण करता है. यह पट्टचित्र फ्रेडेरिक्सेन को मोदी ने पिछले साल उनकी भारत यात्रा पर उपहार में दिया था. इससे पहले, डेनिश प्रधानमंत्री ने यहां हवाईअड्डे पर मोदी की अगवानी की, जहां प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्य प्रधानमंत्री (मोदी) का स्वागत करने के लिए पारंपरिक वेशभूषा में आए थे. मोदी ने जब यहां भारतीय समुदाय से संवाद किया उस वक्त डेनिश प्रधानमंत्री भी मौजूद थीं. फ्रेडेरिक्सेन ने कहा, ‘‘मुझे आपसे यह कहना है कि आप सचमुच में जानते हैं कि एक राजनेता का स्वागत कैसे करना है. कृपया डेनिश लोगों को सिखाएं कि यह कैसा किया जाता है.’’

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