यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के खिलाफ अमेरिका के साथ आने के लिये भारतीय नेताओं को कर रहे हैं प्रेरित

वाशिंगटन. व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका भारतीय नेताओं के संपर्क में है और यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के खिलाफ उसके साथ मिकलर काम करने के लिये उन्हें प्रेरित करना जारी रखेगा. दैनिक संवाददाता सम्मेलन में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी से बुधवार को पूछा गया कि यूक्रेन में युद्ध के बीच क्षेत्र में शांति लाने के लिए दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्र कैसे एक साथ काम कर रहे हैं.

साकी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं कि हम हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा दल के जरिए विभिन्न माध्यमों से भारत के नेताओं के संपर्क में हैं और यूक्रेन पर (रूस के) राष्ट्रपति (व्लादिमीर) पुतिन के हमले के खिलाफ खड़े होने के लिए हमारे साथ निकटता से काम करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं.’’ अमेरिका 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की ंिनदा करने और मॉस्को पर सख्त प्रतिबंध लगाने के लिए वांिशगटन और उसके सहयोगियों का समर्थन करने का दुनिया भर के देशों पर दबाव डाल रहा है.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ंिब्लकन ने पिछले सप्ताह कहा, ‘‘हमारे सहयोगियों और भागीदारों के साथ, अमेरिका यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि रूसी संघ की सरकार यूक्रेन पर आक्रमण के लिए एक गंभीर आर्थिक और राजनयिक कीमत चुकाए.’’ शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने 11 मार्च को रूस के खिलाफ और प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए कहा, ‘‘हम यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता का सामना करने के लिए दुनिया भर में अपने सहयोगियों और भागीदारों के साथ बनाई गई मजबूत साझेदारी व एकजुटता का स्वागत करते हैं. साथ में, हम यूक्रेन के लोगों का समर्थन कर रहे हैं और क्रेमलिन द्वारा थोपे गए युद्ध के लिए गंभीर प्रतिबंध और नतीजे सुनिश्चित कर रहे हैं.’’ पिछले दो सप्ताह में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने दिखाया है कि वह रूस के साथ भारत के संबंध और सैन्य एवं सुरक्षा जरूरतों के लिए उसकी मॉस्को पर अत्यधिक निर्भरता के मद्देनजर रूस के संबंध में भारत के रुख को समझता है.

अमेरिकी ंिहद प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल जॉन क्रिस्टोफर एक्विलिनो ने पिछले सप्ताह संसद में एक सुनवाई के दौरान कहा था कि अमेरिका और भारत एक ‘‘जबरदस्त साझेदार’’ हैं और दोनों देशों की सेनाओं के बीच संबंध संभवत: शीर्ष ंिबदु पर हैं.
ंिहद-प्रशांत सुरक्षा मामलों के लिये सहायक रक्षा मंत्री एली रैटनर ने एक अन्य बैठक में सदन की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्यों से कहा था, ‘‘हम समझते हैं कि भारत का रूस के साथ जटिल इतिहास और संबंध है.’’ इसबीच अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी के दो प्रमुख सांसदों ने भारत से रूस के यूक्रेन पर आक्रमण की ंिनदा करने की अपील की है. सांसदों ने कहा कि 21वीं सदी में इस प्रकार की घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है.

अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दो सांसदों टेड डब्ल्यू ल्यू और टॉम मालिनोव्स्की ने पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा, ‘‘यद्यपि हम भारत के रूस के साथ संबंधों से वाकिफ हैं, लेकिन हम संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो मार्च को हुए मतदान में हिस्सा नहीं लेने के आपकी सरकार के फैसले से निराश हैं.’’ उन्होंने कहा कि रूस द्वारा बिना उकसावे के किया गया हमला नियम आधारित व्यवस्था की अनदेखी करता है ‘‘यूक्रेन पर हमला कर रूस उन नियमों को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है जो भारत की भी सुरक्षा करते हैं.’’ पत्र में सांसदों ने कहा,‘‘ संयुक्त राष्ट्र चार्टर को भारत के ऐतिहासिक समर्थन तथा क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांत हमें उम्मीद देते हैं कि भारत रूसी हमले की पृष्ठभूमि में यूक्रेन की संप्रभुता को समर्थन देने वाले अन्य लोकतंत्रों का साथ देगा.’’

उन्होंने कहा कि वे अमेरिका और भारत के बीच ‘‘गहरे मूल्यों’’ वाले संबंधों को समझते हैं ,‘‘साथ ही हम इस बात से निराश हैं कि भारत ने रूस की इस हरकत के खिलाफ यह रुख अपनाया है.’’ पत्र में कहा गया,‘‘ हम समझते हैं कि भारत मुश्किल भरे बीच के रास्ते पर चल रहा है,लेकिन रूस की कार्रवाई का 21वीं सदी में कोई स्थान नहीं है. कई देश जिनके रूस के साथ संबंध थे,उन्होंने सही काम किया और रूसी सरकार की आलोचना की- उन्होंने इतिहास में सही साबित होने वाले पक्ष का चयन किया और भारत को भी ऐसा ही करना चाहिए.’’ दोनों सांसदों ने 16 मार्च को लिखे पत्र में कहा,‘‘ हम उम्मीद करते हैं कि भारत दोनों पक्षों पर दोषारोपण के अपने वर्तमान रूख से हटेगा और इस बात को स्वीकार करेगा कि इस संघर्ष में रूस हमलावर है.’’

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