आइए स्थानीय को वैश्विक बनाएं, भारतीय उत्पादों की प्रतिष्ठा बढ़ाएं: प्रधानमंत्री मोदी

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत द्वारा इस वित्त वर्ष में 400 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल करना दर्शाता है कि उसके उत्पादों की मांग दुनिया भर में बढ़ रही है. मोदी ने कहा कि जब हर भारतीय ‘लोकल के लिए वोकल’ (स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने वाला) होता है, तब स्थानीय उत्पादों को वैश्विक होते देर नहीं लगती है.

मोदी ने रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा कि सरकार ने पिछले एक साल में सरकारी ई-मार्केट (जीईएम) पोर्टल के जरिए एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की चीजें खरीदी हैं और देश के कोने-कोने से करीब-करीब सवा-लाख लघु उद्यमियों और छोटे दुकानदारों ने अपना सामान सरकार को सीधे बेचा है.

उन्होंने कहा कि एक जमाना था, जब बड़ी कम्पनियां ही सरकार को सामान बेच पाती थीं, लेकिन अब देश बदल रहा है और पुरानी व्यवस्थाएं भी बदल रही हैं. उन्होंने कहा, ‘‘अब छोटे से छोटा दुकानदार भी जीईएम पोर्टल पर सरकार को अपना सामान बेच सकता है. यही तो नया भारत है. यह न केवल बड़े सपने देखता है, बल्कि उस लक्ष्य तक पहुंचने का साहस भी दिखाता है, जहां पहले कोई नहीं पहुंचा हो. इसी साहस के दम पर हम सभी भारतीय मिलकर आत्मनिर्भर भारत का सपना भी जरुर पूरा करेंगे.’’

प्रधानमंत्री ने आयुष उत्पादों के बाजार और उससे जुड़े स्टार्ट अप की संख्या बढ़ने की भी सराहना की. उन्होंने उद्यमियों से कहा कि वे अपने पोर्टल संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं में उपलब्ध कराने की कोशिश करें, क्योंकि कई देशों में अंग्रेजी न तो बोली जाती है और ना ही वे ठीक से अंग्रेजी समझ पाते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘आप इन देशों को भी ध्यान में रखकर अपनी सूचना का प्रसार करें. मुझे भरोसा है कि जल्द ही बेहतर गुणवत्ता के उत्पादों के साथ भारत के आयुष स्टार्ट अप का दुनियाभर में दबदबा होगा.’’ मोदी ने भारतीय उत्पादों की क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि इनकी ताकत का आधार देश के किसान, कारीगर, बुनकर, इंजीनियर, छोटे उद्यमी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र और कई अलग-अलग व्यवसायों के लोग हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इन लोगों की कड़ी मेहनत से 400 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल हो पाया और मैं खुश हूं कि भारत के लोगों की यह ताकत अब दुनिया के हर कोने में नए बाजारों में पहुंच रही है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब एक-एक भारतवासी ‘लोकल के लिए वोकल’ होता है, तब स्थानीय उत्पादों को वैश्विक होते देर नहीं लगती. आइए, स्थानीय को ‘वैश्विक’ बनाएं और अपने उत्पादों की प्रतिष्ठा को और बढ़ाएं.’’

उन्होंने कहा कि भारत का 400 अरब डॉलर यानी 30 लाख करोड़ रुपये मूल्य की वस्तुओं के निर्यात का लक्ष्य पहली नजर में अर्थव्यवस्था से जुड़ा मामला लग सकता है, लेकिन यह भारत की क्षमता से संबंधित हैं. मोदी ने कहा कि इसका अर्थ है कि भारत निर्मित उत्पादों की मांग दुनियाभर में बढ़ रही है और भारत की आपूर्ति श्रृंखला दिन-ब-दिन मजबूत हो रही है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब संकल्प सपनों से बड़े होते हैं तो राष्ट्र बहुत प्रगति करता है. उन्होंने कहा कि जब संकल्पों को पूरा करने के लिए दिन-रात ईमानदार प्रयास किए जाते हैं, तो फल मिलता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के कोने-कोने से नए-नए उत्पाद विदेश जा रहे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने असम के हैलाकांडी के चमड़ों के उत्पाद, उस्मानाबाद के हथकरघा के उत्पाद, बीजापुर की फल-सब्जियों, चंदौली के काले चावल और त्रिपुरा के कटहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका निर्यात तेजी से बढ़ा है.

उन्होंने कहा, ‘‘अब, आपको दुबई और सऊदी अरब में भी लद्दाख की विश्व प्रसिद्ध खुबानी मिल जाएगी, आपको तमिलनाडु के केले मिल जाएंगे. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई नए उत्पाद अब नए देशों में भेजे जा रहे हैं.’’ चालू वित्त वर्ष में भारत का निर्यात 37 प्रतिशत बढ़कर 400 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. वित्त वर्ष 2020-21 में यह 292 अरब डॉलर रहा था. निर्यात के मामले में भारत का पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2018-19 में 330.07 अरब डॉलर का रहा था.

मोदी ने स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे लोगों और पशुओं एवं पक्षियों के लिए जल सुनिश्चित करने का भी जिक्र किया. उन्होंने देशवासियों से जल ही हरेक बूंद बचाने और पानी के पुनर्चक्रण के लिए काम करने की अपील की.

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