महामारी से हुए नुकसान के बाद अब स्वास्थ्य ढांचे, अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत: मोदी

नयी दिल्ली. कोविड-19 संक्रमण के दूसरे लहर की भयावहता से उबरने की कोशिशों में जुटे भारत के प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे में सुधार और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के काम को हमारी भावी चुनौतियों के केंद्र में रखने की जरूरत है.

देश की आर्थिक वृद्धि दर को मजबूती के साथ उच्च स्तर पर बनाए रखने के उद्येश्य से सरकार लगातार सुधारों पर जोर दे रही है . साथ ही इस समय महामारी से प्रभावित गरीब जनता के लिए उसने मुफ्त अनाज वितरण कार्यक्रम को भी दिवाली तक बढ़ा दिया है.

स्टार्ट-अप क्षेत्र पर केंद्रित विवाटेक सम्मेलन के पांचवें संस्करण को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘पिछले वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में हमने कई रूकावटें देखी और इसका असर अभी भी दिख रहा है लेकिन इनके बावजूद हताशा पैदा नहीं हुई.’’ उन्­होंने कहा, ‘‘हमें इन्हें दुरुस्त करने और तैयारी करने के दो सिद्धांतों पर ध्­यान देना चाहिए.’’

उन्होंने कहा कि पिछले साल इसी समय सारा विश्व कोविड19 के टीके की खोज को लेकर तैयारियां कर रहा था . अब भारत ने कोविड के दो टीके बना लिए हैं जबकि कुछ और टीकों के विकास एवं परीक्षण का काम चल रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘हमें स्वास्थ्य ढांचे और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को दुरुस्त करना जारी रखना होगा.’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जब मैं तैयार रहने की बात करता हूं तो मेरा मतलब है कि आगामी महामारी से दुनिया को बचाना है, पर्यावरणीय क्षरण को रोकने वाली सतत जीवनशैली पर ध्यान सुनिश्चित करना और नवाचार के साथ ही अनुसंधान में सहयोग को और मजबूत करना है.’’

उल्लेखनीय है कि कोविड महामारी को फैलने से रोकने लिए पहली लहर में देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया जबकि दूसरी लहर में राज्यों ने चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन लगाया. इसकी वजह से आर्थिक गतिविधियां देश में ठप्प हो गईं और भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि महामारी के बावजूद भारत अनुकूल और लचीला बना हुआ है और खनन, अंतरिक्ष, बैंंिकग, परमाणु ऊर्जा और अन्­य क्षेत्रों में लागू किए गए बड़े सुधार यही दर्शाते हैं. प्रधानमंत्री ने भारत को सबसे बड़े स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्रों में एक बताया और वैश्विक निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया.

उन्होंने कहा कि भारत में आज वह सब कुछ है जिसकी स्­टार्टअप और निवेशकों को जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं प्रतिभा, बाजार, पूंजी, परिवेश और खुलेपन की संस्कृति… इन पांच स्तंभों के आधार पर दुनिया को भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित करता हूं.’’ मोदी ने कहा कि जहां पारम्­परिक उद्यम नाकाम होते हैं वहां नवाचार से सहायता मिलती है.

उन्­होंने कहा, ‘‘कोविड महामारी ने अनेक पारम्­परिक विधियों को परखने का अवसर दिया और नवाचार ने ही इस स्थिति से बाहर निकाला. डिजिटल मीडिया से लोगों को संकट से निपटने, जुड़ने और छोटी जगह से भी काम करने में मदद मिली है.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में स्­वदेशी तकनीक के कारण कोविड महामारी से लड़ाई में मदद मिली है.

उन्होंने कहा कि आरोग्­य सेतू एप संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का प्रभावी ढ़ग से पता लगाने में काम आया वहीं कोविन प्­लेटफॉर्म से लाखों लोगों को कोरोना टीका लगाने में मदद मिली. प्रधानमंत्री ने कहा कि आधार के कारण महामारी के दौरान समय पर मदद उपलब्­ध कराने, नि:शुल्­क राशन और खाद्य तथा रसोई ईंधन वितरित करने में भी सहायता मिली.

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और फ्रांस व्यापक विषयों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं तथा यह समय की जरूरत है कि दोनों देश इस साझेदारी को आगे जारी रखें. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ओर विभिन्न यूरोपीय देशों के मंत्री और सांसद भी इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ताओं में शामिल हुए.

इस कार्यक्रम में एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक, फेसबुक के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग और माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रेड स्मिथ सहित कॉर्पोरेट जगत की अन्य जान-मानी हस्तियों को भी आमंत्रित किया गया है.

विवाटेक यूरोप का सबसे बड़ा डिजिटल और स्टार्टअप कार्यक्रम है और 2016 से हर साल पेरिस में इसका आयोजन किया जाता रहा है.विज्ञापन और मार्केंिटग जगत की प्रमुख कंपनी पब्लिसीज ग्रुप और फ्रांस के अग्रणी मीडिया समूह लेस इकोज की ओर से संयुक्त रूप से इसका आयोजन किया जाता है.

यह आयोजन प्रौद्योगिकी नवाचार और स्टार्टअप इको सिस्टम के हितधारकों को एक साथ लाता है. इस आयोजन में प्रदर्शनियां, पुरस्कार, पैनल चर्चा और स्टार्टअप प्रतियोगिताएं शामिल की जाती हैं. इसके पांचवें संस्करण का आयोजन 19 जून तक चलेगा.

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