नक्सली हमला ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर हिंसा का सिलसिला फिर शुरू करने का प्रयास, अलर्ट पर बल

नयी दिल्ली. ओडिशा में हाल में सीआरपीएफ के जवानों पर घात लगाकर किए गए हमले और उनके हथियार लूटने की घटना के बारे में सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि माओवादी उन इलाकों में हिंसा का सिलसिला फिर से शुरू करना चाहते हैं जहां सुरक्षाबलों ने अपना दबदबा कायम कर लिया है.

छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे राज्य के नुआपाड़ा जिले में 21 जून को नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के दो उपनिरीक्षक और एक कांस्टेबल की जान चली गई थी. माओवादी उनकी अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल भी लूटकर ले गए थे.

इस संबंध में एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि हमले की चपेट में आए तीनों जवान सड़क खोलने की कवायद में लगी अपनी टीम से संभवत: अलग रह गए थे. उन्होंने कहा कि हमले को नक्सलियों के सेंट्रल मिलिटरी कमीशन और ओडिशा स्टेट माओइस्ट कमेटी के प्रमुख मल्ला राजी रेड्डी उर्फ ??सथेना/मुरली/संग्राम ने अंजाम दिलवाया. तीनों सीआरपीएफ कर्मी उस समय मारे गए जब वे एक खुले मैदान में एक पेड़ के नीचे थे. उन पर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) से हमला किया गया था.

तीनों कर्मी (सीआरपीएफ) की 19वीं बटालियन की ‘गोल्फ’ कंपनी के थे और एक नए अग्रिम अभियान केंद्र को सुरक्षित करने के लिए जा रहे थे, जिसे बल ने हमले से तीन दिन पहले ही क्षेत्र में स्थापित किया था. अधिकारी ने कहा, “नुआपाड़ा जिले और इसके दूरदराज के इलाकों में कोई हिंसक घटना नहीं हुई है, जिसमें सहजपानी गांव के पास का वह स्थान भी शामिल है जहां मंगलवार को घात लगाकर हमला किया गया था. यह माओवादियों द्वारा अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और अपनी गतिविधियों को फिर से शुरू करने का एक प्रयास प्रतीत होता है.”

उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने हाल ही में क्षेत्र में एक अग्रिम केंद्र स्थापित किया है ताकि “माओवादियों की आपूर्ति लाइन को काट दिया जाए और कैडर के दक्षिण छत्तीसगढ़ में सीमा पार से काम करने तथा उनके इस क्षेत्र में भाग आने” पर रोक लगाई जा सके. इस संबंध में एक अन्य अधिकारी ने कहा कि नक्सलियों की एक बड़ी टीम ने सीआरपीएफ के तीन जवानों पर घात लगाकर हमला किया और उनकी एके सीरीज राइफल लूट लीं. उन्होंने कहा कि माना जाता है कि इस हमले को पूरी तरह से मल्ला राजी रेड्डी ने अंजाम दिलाया.

उन्होंने कहा कि स्टेट कमेटी के सदस्य गुड्डू के नेतृत्व में स्थानीय मैनपुर-नुआपाड़ा डिवीजन की भाकपा (माओवादी) इकाई के इलाके में आने की खबर थी. अधिकारी ने कहा, ‘‘लंबे समय तक शांत रहने के बाद, मैनपुर (छत्तीसगढ़)-नुआपाड़ा (ओडिशा) डिवीजन के एक शीर्ष माओवादी कैडर ने क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए बल तैयार हैं और सतर्क हैं.’’

घटना के दिन सीआरपीएफ के एक प्रवक्ता ने कहा था कि उनके ‘‘जवानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए माओवादियों को भागने पर मजबूर कर दिया, जबकि तीन बहादुरों ने मुठभेड़ में सर्वोच्च बलिदान दिया.’’ अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल जून में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा लाए गए देश के वाम उग्रवाद प्रभावित जिलों के नए वर्गीकरण के अनुसार, नुआपाड़ा देश के नक्सली हिंसा से ‘‘सर्वाधिक प्रभावित’’ जिलों में शामिल नहीं है.

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