उत्तर कोरिया ने लंबी दूरी की मिसाइल का किया परीक्षण

सियोल. उत्तर कोरिया ने बृहस्पतिवार को अब तक की अपनी संभवत: सबसे बड़ी अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम)का समुद्र की ओर परीक्षण किया. यह जानकारी इसके पड़ोसी देशों ने दी. अमेरिका और अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों को लक्षित अपने दबाव अभियान को उत्तर कोरिया ने इस परीक्षण के जरिये और बढ़ा दिया है. उत्तर कोरिया चाहता है कि अमेरिका समेत अन्य विरोधी देश उसे परमाणु शक्ति से लैस राष्ट्र के रूप में स्वीकार करते हुए उस पर लगे भारी प्रतिबंधों को हटा लें.

यह परीक्षण अमेरिका और दक्षिण कोरियाई सेना के उस बयान के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि उत्तर कोरिया लंबी दूरी की अंतर-महाद्वीपीय मिसाइल के परीक्षण की तैयारी कर रहा है. उत्तर कोरिया ने इस मिसाइल का अनावरण 2020 में किया था.
दक्षिण कोरियाई सेना ने जल, थल और हवा से अपनी मिसाइल का परीक्षण कर उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण का जवाब दिया था.

दक्षिण कोरिया ने यह भी कहा है कि उत्तर कोरियाई मिसाइल परीक्षण केंद्र और इसके कमान एवं सुविधा केंद्र पर सटीक निशाना साधने की पूरी तैयारी है. दक्षिण कोरिया की इस प्रतिक्रिया से दोनों कोरियाई देशों के बीच फिर से तनाव बढ़ने के आसार हैं. वहीं, परमाणु हथियारों को लेकर उत्तर कोरिया से बातचीत बंद है.

दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ आॅफ स्टॉफ और रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया ने प्योंगयांग के पास स्थित सुनान क्षेत्र से अपनी अंतर-महाद्वीपीय मिसाइल का परीक्षण किया, जिसने 6,200 किलोमीटर की ऊंचाई पर 1,080 किलोमीटर की दूरी तय की.
इससे स्पष्ट होता है कि मिसाइल का परीक्षण सामान्य से अधिक कोण पर किया गया ताकि यह जापानी क्षेत्र में नहीं पहुंच सके. जापान के उप रक्षामंत्री माकोतो ओनिकी ने भी इस तरह का ब्योरा देते हुए सुझाया कि यह नये तरह की अंतर-महाद्वीपीय मिसाइल है.
जी-7 के शिखर सम्मेलन में भाग लेने बेल्जियम पहुंचे प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने पत्रकारों से कहा कि मिसाइल संभवत: होक्काइदो द्वीप से सटे जापानी जल क्षेत्र के पास गिरी.

किशिदा ने कहा, ‘‘यह अक्षम्य लापरवाही है. इस कृत्य की हम भर्त्सना करते हैं.’’ तोक्यो के मुख्य कैबिनेट सचिव हिरोकाजू मत्सुनो ने कहा कि मिसाइल ने 71 मिनट तक उड़ान भरी. उन्होंने कहा कि जापान मिसाइल का मलबा तलाश रहा है, ताकि उसमें इस्तेमाल की गई तकनीक का पता लगाया जा सके. दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने उत्तर कोरियाई नेता किम-जोंग उन की आलोचना की. उन्होंने कहा कि आईसीबीएम परीक्षणों पर लगे प्रतिबंध को तोड़ना क्षेत्र और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक ‘‘गंभीर खतरा’’ है. राष्ट्रपति के कार्यालय ने यह जानकारी दी.
अमेरिका ने भी प्रक्षेपण की कड़ी आलोचना की है. ’’ाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताओं का खुला उल्लंघन करार देते हुए कहा कि इससे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है.

साकी ने कहा, ‘‘कूटनीति के रास्ते बंद नहीं हुए हैं, लेकिन प्योंगयांग को क्षेत्र को अस्थिर करने वाले कदम पर तुरंत रोक लगानी होगी. संयुक्त राष्ट्र अमेरिकियों, दक्षिण कोरियाई और जापानी सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठायेगा.’’ यह इस साल उत्तर कोरिया का 12वां परीक्षण था. गत रविवार को उत्तर कोरिया ने समुद्र में संदिग्ध गोले दागे थे. विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया अपने शस्त्रागार को आधुनिक बनाने के लिए तेजी से कार्रवाई कर रहा है और रूकी पड़ी परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता के बीच अमेरिका पर रियायतें देने के लिए इसके जरिए दबाव डालना चाहता है.

उत्तर कोरिया ने कई प्रकार की नई मिसाइलों का भी परीक्षण किया है, जिसमें एक कथित हाइपरसोनिक हथियार और एक मध्यम दूरी की मिसाइल शामिल है, जो 2017 के बाद से उसका पहला परीक्षण था. यह मिसाइल संभावित रूप से प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य केन्द्र गुआम तक पहुंचने की क्षमता रखती है.

उत्तर कोरिया ने हाल के हफ्तों में अपने राजधानी क्षेत्र के पास से दो मध्यम-दूरी के परीक्षण किए हैं. अमेरिका तथा दक्षिण कोरियाई सेनाओं ने बाद में बताया था कि इसमें उत्तर कोरिया के सबसे बड़े आईसीबीएम अर्थात अन्तर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (’’ासोंग -17) के घटक शामिल थे. उनका कहना है कि जल्द पूरी क्षमता के साथ इसका परीक्षण किया जा सकता है. उत्तर कोरिया के आधिकारिक मीडिया ने जोर देकर कहा है कि उन दो परीक्षणों का उद्देश्य एक जासूसी उपग्रह के लिए कैमरे और अन्य प्रणाली विकसित करना था.

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं से बचने के लिए अंतरिक्ष परीक्षण के बहाने आईसीबीएम परीक्षण फिर से शुरू करने और कुछ स्तर तक अंतरिक्ष आधारित टोही क्षमता हासिल करने का प्रयास कर रहा है.
यह परीक्षण संभवत: अप्रैल में देश के संस्थापक एवं वर्तमान नेता किम जोंग-उन के दिवंगत दादा, किम इल-सुंग की जयंती के आसपास किया जा सकता है.

उत्तर कोरिया, 2017 में तीन आईसीबीएम परीक्षणों के साथ अमेरिका की सरजमीं तक पहुंचने की क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है.
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी मिसाइल ’’ासोंग-17 विकसित करने का मकसद, उत्तर कोरिया द्वारा मिसाइल रक्षा प्रणालियों को और आगे बढ़ाने के लिए उसे कई हथियारों से लैस करना भी हो सकता है. ’’ासोंग-17 मिसाइल के बारे में सबसे पहले अक्टूबर 2020 में दुनिया को पता चला था.

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