MPPSC परीक्षा से कश्मीर का आपत्तिजनक सवाल हटा, पर्चा तैयार करने वाले डाले गये काली सूची में

इंदौर/भोपाल. मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की दो दिन पहले आयोजित राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 में कश्मीर को लेकर आपत्तिजनक सवाल पर उत्पन्न विवाद के तूल पकड़ने के बाद आयोग ने इस प्रश्न की सामग्री से मंगलवार को असहमति जताई. उसने इसके साथ ही संबंधित प्रश्नपत्र तैयार करने वाले दो लोगों को अपनी काली सूची में डाल दिया है. एमपीपीएससी के एक आला अधिकारी ने इंदौर में यह जानकारी दी.

इसी बीच, मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में संवाददाताओं से कहा, ‘‘एमपीपीएससी की परीक्षा में कश्मीर से जुड़ा विवादित प्रश्न पूछने का प्रसंग आपत्तिजनक है. जो दो (व्यक्ति) प्रश्नपत्र बनाने वाले थे, उनमें से एक मध्यप्रदेश और एक महाराष्ट्र का है. विवादास्पद प्रश्न पूछने वाले दोनों पेपर सेटर्स पर भविष्य में प्रश्न पत्र तैयार करने पर रोक लगा दी गई है. सरकार एमपीपीएससी एवं उच्च शिक्षा विभाग को दोनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लिख रही है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘पूरे देश के अंदर इसकी सूचना दे दी गई है कि दोनों व्यक्तियों पर भविष्य में प्रश्न पत्र तैयार करने पर रोक लगा दी गई है और इनसे कोई काम न लें.’’

एमपीपीएससी के विशेष कार्याधिकारी रवींद्र पंचभाई ने इंदौर में संवाददाताओं को बताया, ‘‘राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 के सामान्य अभिरुचि परीक्षण के पर्चे में कश्मीर को लेकर पूछे गए प्रश्न की सामग्री से हम सहमत नहीं हैं. इसलिए हमने इस प्रश्न को परीक्षा से हटा दिया है.’’ उन्होंने यह भी बताया कि एमपीपीएससी ने संबंधित प्रश्नपत्र के सेटर (प्रश्नपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति) और मॉडरेटर (तैयार पर्चे को छपाई से पहले जांचने वाला शख्स) को काली सूची में डाल दिया है, यानी उन्हें एमपीपीएससी की परीक्षा प्रणाली से हमेशा के लिए बाहर कर दिया गया है.

पंचभाई ने बताया कि एमपीपीएससी द्वारा दोनों व्यक्तियों के विभागों को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लिखा गया है. उन्होंने हालांकि भर्ती परीक्षा की गोपनीयता का हवाला देते हुए विवादास्पद प्रश्नपत्र के सेटर और मॉडरेटर के नामों का खुलासा करने से इनकार कर दिया.

अधिकारियों ने बताया कि एमपीपीएससी की रविवार को आयोजित राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 में सामान्य अभिरुचि परीक्षण के प्रश्नपत्र में कथन के रूप में सवाल किया गया कि क्या भारत को कश्मीर को पाकिस्तान को दे देने का निर्णय कर लेना चाहिए? इस सवाल पर पर्चे में पहला तर्क दिया गया,‘‘हां, इससे भारत का बहुत-सा धन बचेगा.’’ दूसरा तर्क दिया गया, ‘‘नहीं, ऐसे निर्णय से इसी तरह की और भी मांगें बढ़ जाएंगी.’’ प्रश्नपत्र में इस सवाल के जवाब के लिए परीक्षार्थियों को चार विकल्प दिए गए थे. इनमें से पहले विकल्प में पहले तर्क को सही बताया गया था, दूसरे विकल्प में दूसरे तर्क को सही बताया गया था, तीसरे विकल्प में पहले और दूसरे, दोनों तर्कों को सही बताया गया था और चौथे विकल्प के अनुसार, पहला और दूसरा, दोनों तर्क सही नहीं हैं.

इस बीच, कश्मीर को लेकर आपत्तिजनक प्रश्न का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर फैल गया है. इस प्रश्न पर आक्रोशित लोग और विपक्षी नेता एमपीपीएससी की आयोजित परीक्षा में ऐसा सवाल किए जाने के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं.
प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष के के मिश्रा ने एमपीपीएससी के चेयरमेन के इस्तीफे की मांग करने के साथ-साथ प्रश्नपत्र चयनकर्ता पर प्राथमिकी दर्ज की भी मांग की.

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “यह स्पष्ट रूप से राष्ट्रद्रोह का मामला है. कश्मीर को लेकर ऐसा सवाल पूछा गया था, जिसके लिए सैनिकों, लोगों और नेताओं ने अपना जीवन बलिदान कर दिया. एमपीपीएससी ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है.’’ मिश्रा ने कहा, ‘‘अब सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या प्रधानमंत्री, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश के गृह मंत्री की सहमति से सवाल पूछा गया था? ’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी की मांग है कि एमपीपीएससी के चेयरमेन इस्तीफा दें और प्रश्नपत्र चयनकर्ता के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज हो.’’

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