पाक: अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने का मामला: शीर्ष अदालत ने सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित की

इस्लामाबाद. पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय ने नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने और उसके बाद संसद को भंग करने के मामले में सुनवाई सोमवार को एक दिन के लिए स्थगित कर दी. उच्चतम न्यायालय की एक वृहद पीठ इस मामले में सुनवाई कर रही है और इसमें प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल, न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन, न्यायमूर्ति मजहर आलम खान मियांखेल, न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर और न्यायमूर्ति जमाल खान मंडोखाइल शामिल हैं.

नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने तथाकथित विदेशी साजिश से जुड़े होने का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. मामले में राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सभी राजनीतिक दलों को प्रतिवादी बनाया गया है. उपाध्यक्ष के फैसले को लेकर सरकार और विपक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलों को पेश किया. सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अदालत सुनवाई समाप्त करने से पहले सभी पक्षों के प्रतिनिधियों को सुनेगी.’’ इसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई मंगलवार की दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

पाकिस्तान में विपक्षी दलों ने ‘‘अपना सत्र’’ बुलाया, ‘‘अविश्वास प्रस्ताव’’ किया पारित
पाकिस्तान में एक नाटकीय घटनाक्रम में विपक्ष ने राष्ट्रपति आरिफ अल्वी द्वारा संसद भंग किए जाने के बाद एक ‘‘अपना सत्र’’ बुलाया और प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ ‘‘अविश्वास प्रस्ताव’’ को करीब 200 मतों के साथ पारित कर, उसके ‘‘सफल’’ होने की घोषणा कर दी.

समाचार पत्र ‘डॉन’ में सोमवार को प्रकाशित एक खबर के अनुसार, ‘‘मतदान’’ के परिणाम की घोषणा पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता एवं नेशनल असेंबली (एनए) के पूर्व अध्यक्ष सरदार अयाज सादिक ने की, जिन्होंने रविवार को एनए के अध्यक्ष असद कैसर द्वारा घोषित अध्यक्षों के पैनल के सदस्य के रूप में बैठक की अध्यक्षता की थी. खबर के अनुसार, विपक्ष ने कार्यवाही को ‘‘कानूनी एवं वैध’’ घोषित किया, हालांकि यह सचिवालय के कर्मचारियों के समर्थन के बिना और यहां तक कि ध्वनि उपकरण के बिना भी आयोजित किया गया था. उन्होंने प्रधानमंत्री खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को 197 मतों के साथ सफल घोषित किया.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली को भंग कर दिया है. इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. खान ने संसद के निचले सदन, 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में प्रभावी तौर पर बहुमत खो दिया था.

देश के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने पाकिस्तान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि नेशनल असेंबली को भंग करने के संबंध में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा शुरू किए गए सभी आदेश और कदम अदालत के आदेश पर निर्भर होंगे. न्यायाधीश बंदियाल ने साथ ही इस ‘हाई-प्रोफाइल’ मामले की सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी थी.

विपक्ष के नेशनल असेंबली ‘‘सत्र’’ के दौरान, सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के पूर्व सहयोगियों के सदस्यों और पीटीआई के 22 असंतुष्ट सांसदों ने उस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया, जिसे औपचारिक रूप से विपक्ष के नेता एवं पीएमएल के अध्यक्ष एन शहबाज शरीफ द्वारा प्रस्तुत किया गया था. खबर के अनुसार, हैरानी की बात यह रही कि पीएमएल-क्यू के प्रमुख चौधरी शुजात हुसैन के बेटे चौधरी सालिक हुसैन ने भी विपक्ष के प्रस्ताव का समर्थन किया. यह कदम चौधरी परिवार में कथित दरार की पुष्टि करता है.

सचिवालय के कर्मचारियों की अनुपस्थिति में, सादिक के मतदान शुरू होने की घोषणा करने के बाद, मुर्तजा जावेद अब्बासी (जो पीएमएल-एन सरकार के दौरान डिप्टी स्पीकर थे) उन सदस्यों के नाम दर्ज करते दिखे, जो वोट देने पहुंचे थे. खबर के मुताबिक, अब्बासी ने कहा कि उपाध्यक्ष कासिम सूरी को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा किए बिना बैठक का सत्रावसान करने का अधिकार नहीं है. खबर के अनुसार, सादिक ने अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और कार्यवाही का संचालन किया.

उन्होंने ध्वनि मत के माध्यम से सदस्यों की मंजूरी लेने के बाद उपाध्यक्ष के फैसले को पलट दिया और फिर शहबाज को मतदान के लिए प्रस्ताव को औपचारिक रूप से पेश करने की अनुमति दी और मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे छह अप्रैल तक ‘‘स्थगित’’ कर दिया. नेशनल एसेंबली को भंग किए जाने के बाद, उच्चतम न्यायालय ने सभी पक्षों को कोई ‘‘असंवैधानिक’’ कदम ना उठाने का आदेश देते हुए सोमवार को मामले पर सुनवाई करने का फैसला किया था.

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