‘सुशासन के इंस्टीट्यूशन’ हैं प्रधानमंत्री मोदी: नकवी

नयी दिल्ली. केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, “सुशासन का इंस्टीट्यूशन एवं समावेशी विकास का मिशन” हैं. उन्होंने आज यहां पुस्तक के विमोचन के अवसर पर यह भी कहा कि ‘‘मोदी बैंिशग ब्रिगेड” की राजनीतिक असहिष्णुता और “मोदी फोबिया” की सनक को परास्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कड़े परिश्रम एवं तपस्या से सुशासन एवं समावेशी सशक्तीकरण के मिशन को अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणिकता दी है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री “सुशासन का इंस्टीट्यूशन एवं समावेशी विकास का मिशन” हैं. उनके मुताबिक, मोदी के “परिश्रम-परिणाम के मंतर” ने “परिक्रमा पॉलिटिक्स को छू मंतर’’ किया है. किताब का विमोचन उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू द्वारा किया गया.

भारतीय राजनीति में मोदी के प्रादुर्भाव को उनके निंदक भी ‘अद्भुत घटना’ मानते : उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ंिनदक भी इस बात से सहमत दिखते हैं कि भारतीय राजनीति में उनका प्रादुर्भाव एक ‘‘अद्भुत घटना’’ है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जिस प्रकार आजादी के आंदोलन को संभ्रांत लोगों के हाथों से लेकर उसे जन आंदोलन का स्वरूप दिया, उसी प्रकार मोदी ने विकास कार्यों को जन आंदोलन में तब्दील किया है.

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी मूल्यवान प्रवीणता का प्रभावी इस्तेमाल अपने राज्य के विकास की कहानी लिखने में किया और बाद में देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने उसे गति दी. यहां विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में ‘‘मोदी@20 : ड्रीम्स मीट डिलीवरी’’ पुस्तक का विमोचन करने के बाद नायडू ने कहा कि मोदी की दूरदृष्टि, उनके सपने और भारत को लेकर उनके मिशन को उनकी व्यापक यात्राओं और अंतर्दृष्टि से एक आयाम मिला.

उन्होंने कहा कि यह मौलिक अंतर है, जो मोदी को कई मायनों में अलग करता है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज के समय में संभवत: दूसरा ऐसा कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में नहीं है, जिसकी यात्रा मोदी के अनुभवों के बराबर हो. नायडू ने कहा कि मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म आजादी के बाद हुआ और जिसने पिछले 20 सालों में आजादी के बाद के भारतीय इतिहास में एक विशेष स्थान बनाया है.

उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि उनके ंिनदक और विरोधी भी इस बात से सहमत दिखते हैं कि भारतीय राजनीति में मोदी का प्रादुर्भाव एक अद्भुत घटना है. आप उन्हें पसंद करें या ना करें, लेकिन ऐसा ही है.’’ नायडू ने कहा कि मोदी की अंतरराष्ट्रीय जगत में भी पहचान है और उनका सम्मान किया जाता है. नायडू ने कहा कि इस पुस्तक में नरेंद्र मोदी की यात्रा का विस्तृत विवरण है कि कैसे महज 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और खुद को पहचानने, देश को जानने और फिर देश के कायापलट को अंजाम देने के मिशन पर निकल पड़े.

उन्होंने कहा कि किसी भी काम की धीमी गति मोदी को अच्छी नहीं लगती है और वह चाहते हैं कि वह तेज हो ‘‘क्योंकि आजादी के 70 सालों के बाद भी देश में समस्याएं मौजूद हैं.’’ उपराष्ट्रपति ने कहा कि नोटबंदी के बावजूद वह अपनी संवाद कौशल के कारण चुनाव जीत जाते हैं और लोग भी उनपर भरोसा जताते हैं.

उन्होंने कहा कि मोदी की व्यापक दूरदृष्टि को स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर, दीनदयाल उपाध्याय जी और अन्य पथ प्रदर्शकों के जीवन, कार्यों और सिद्धांतों से एक आयाम मिला. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जिस प्रकार आजादी के आंदोलन को संभ्रांत लोगों के हाथों से लेकर उसे जन आंदोलन का स्वरूप दिया, उसी प्रकार मोदी ने विकास कार्यों को जन आंदोलन में तब्दील किया है. बैंक खाते खोले जाने से लेकर मुद्रा योजना और अन्य सरकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए नायडू ने कहा कि इससे जुड़े आंकड़े दर्शाते हैं कि मोदी का रुख ‘‘बड़ी सोच और उसी स्तर पर काम’’ करने का रहता है.

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि इनमें से कुछ जैसे आवास और शौचालय बनाने का काम पहले नहीं हुआ. नायडू के मुताबिक मोदी ने सारे नए काम नहीं किए हैं, लेकिन फर्क यह है कि वह सोचते अलग हैं और करते अलग हैं. उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि मोदी एक वैज्ञानिक हैं जो पहले प्रयोग करते हैं और फिर परिणामों के आधार पर उसे गति देते हैं.

यह पुस्तक प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 20 सालों के राजनीतिक जीवन को दर्शाती है, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल से लेकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक का ब्यौरा शामिल है. इसे उद्योग और राजनीति के प्रख्यात बुद्धिजीवियों और व्यक्तित्वों द्वारा संकलित किया गया है.

पुस्तक ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन द्वारा संपादित और संकलित है. यह प्रख्यात बुद्धिजीवियों और विशेषज्ञों द्वारा लिखित अध्यायों का संकलन है. पुस्तक में योगदान देने वालों में सुधा मूर्ति, सद्गुरु, नंदन नीलेकणी, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, दिवंगत महान गायिका लता मंगेशकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, उद्योगपति उदय कोटक, अभिनेता अनुपम खेर, बैडंिमटन स्टार पीवी सिंधु और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा शामिल हैं.

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