रक्षा बजट में किसी तरह की कमी नहीं, 10 वर्ष में बजट खर्च में 76% वृद्धि : सरकार

नयी दिल्ली. सरकार ने शुक्रवार को कहा कि देश के रक्षा बजट में कोई कमी नहीं है और दस साल के अंदर रक्षा बजट में खर्च 76 प्रतिशत बढ़ गया है. रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने लोकसभा में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि यह कहना उचित नहीं है कि रक्षा का बजट कम है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा की गंभीरता को देखते हुए सबसे अधिक बजट रक्षा मंत्रालय का ही है. भट्ट ने कहा कि यह 2013-14 के बजट से करीब दोगुना होकर लगभग 5.25 लाख करोड़ रुपये हो गया है.

उन्होंने कहा कि ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (सिपरी) के अनुसार रक्षा बजट में खर्च के आधार पर भारत दुनिया में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है. सिपरी के मुताबिक भारत ने 2011 से 2020 के बीच में रक्षा बजट पर खर्च 76 प्रतिशत बजट बढ़ाया है, जबकि पूरी दुनिया में इस अवधि में रक्षा बजट का खर्च केवल 9 प्रतिशत बढ़ा है. उन्होंने कहा कि सिपरी ने 2020 में यह भी कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में निर्यात के लिए भी दृढ़ता से खड़ा है.

भट्ट ने कहा कि रक्षा मंत्रालय के बजट में कोई कमी नहीं है और उसे जब भी जरूरत पड़ती है तो वित्त मंत्रालय तत्काल स्वीकृति देता है.  रक्षा मंत्री राजनाथ ंिसह ने सदन में कहा कि रक्षा बजट को लेकर 2000 में कारगिल समीक्षा समिति बनाई गयी थी जिसमें सेना के वर्तमान अधिकारी, पूर्व अधिकारी, राजनेता और राजनयिक आदि शामिल थे.

उन्होंने कहा कि समिति ने गंभीरता पूर्वक विचार किया कि रक्षा क्षेत्र को आवंटन किस तरह किया जाए. ंिसह के मुताबिक समिति ने सिफारिश दी कि रक्षा के लिए बजट जीडीपी का एक निश्चित प्रतिशत निर्धारित करने की जरूरत नहीं है और साथ ही कहा कि हमें यह देखना चाहिए कि रक्षा पर खर्च हुए प्रत्येक रुपये का अधिकतम मूल्य मिले. एक अन्य पूरक प्रश्न के जवाब में राजनाथ ंिसह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में पूंजी व्यय से 60 प्रतिशत धन केवल भारत में उत्पादन के लिए है और सरकार जरूरत होने पर ही विदेश से आयात करेगी.

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