भारत को जो सुरक्षित नहीं देखना चाहते हैं, वे साइबर हमलों का प्रयास करते हैं : शाह

नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि भारत को जो सुरक्षित नहीं देखना चाहते वे तरह-तरह के साइबर हमले करते हैं और कुछ देशों ने तो साइबर सेनाएं भी बना ली हैं. ‘साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा’ पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसे किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है और सभी तरह के साइबर हमलों को रोकने के लिए प्रौद्योगिकी को उन्नत बना रही है.

उन्होंने कहा, ‘‘साइबर सुरक्षा एक तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है. हमारे देश को जो सुरक्षित नहीं देखना चाहते, वे भी तरह-तरह के साइबर हमले करते हैं. कुछ देशों ने तो साइबर सेनाएं भी बना ली हैं.’’ गृह मंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में साइबर धोखाधड़ी के कई नए आयाम देखने को मिलेंगे और देश को ‘साइबर स्पेस’ की सुरक्षा के मामले में कई तैयारियां करनी होंगी. शाह ने कहा कि साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग है और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इसे मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा, ‘‘हम सब जानते हैं कि साइबर सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है और यह भारत के विकास में कैसे योगदान दे सकती है. साइबर सुरक्षा के बिना भारत की प्रगति संभव नहीं है. साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग है और मोदी नीत सरकार इसे मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.’’ गृह मंत्री ने कहा कि हर कोई जानता है कि ‘साइबर स्पेस’ का दुरुपयोग कोई नयी बात नहीं है और विभिन्न प्रकार के साइबर अपराध अक्सर देखे जाते हैं जिनमें मालवेयर हमले, फिंिशग, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले, डेटा चोरी, आॅनलाइन आर्थिक धोखाधड़ी, बाल अश्लीलता शामिल हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस तरह के अपराध और बढने की आशंका है.

उन्होंने कहा कि नागरिकों की निजता का सवाल पहले से ही है और सभी को महत्वपूर्ण सूचना की सुरक्षा के संदर्भ में अधिक सावधान रहना होगा. शाह ने कहा, ‘‘आने वाले दिनों में डेटा और सूचना दोनों एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने जा रहे हैं, इसलिए हमें डेटा और सूचना की सुरक्षा के लिए खुद को तैयार करना होगा.’’

शाह ने देश में साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या के आंकड़ों का भी हवाला दिया. गृह मंत्री ने कहा, ‘‘2012 में साइबर अपराध के कुल 3,377 मामले दर्ज किए गए थे और 2020 में यह संख्या बढ़कर 50,000 हो गई. जिन साइबर अपराधों की रिपोर्ट नहीं की गई, उनकी संख्या लाखों में हो सकती है. हम सबसे सुरक्षित साइबर माहौल बनाने के लिए संकल्पित हैं.’’ शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय ने लगभग तीन साल पहले साइबर अपराध की सूचना दर्ज कराने के लिए पोर्टल शुरू किया था और अब तक विभिन्न प्रकार के साइबर अपराध के 11 लाख मामले दर्ज किए गए हैं. उन्होंने कहा कि इसके अलावा, पोर्टल पर सोशल मीडिया से जुड़ी दो लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं.

मंत्री ने कहा, ‘‘आने वाले दिनों में यह और बढ़ने वाला है, क्योंकि वर्तमान में 80 करोड़ भारतीय आॅनलाइन सक्रिय हैं. यह एक बड़ी संख्या है और जैसे-जैसे डेटा की कीमतें कम होंगी, वैसे-वैसे अधिक उपयोगकर्ता होंगे.’’ शाह ने कहा कि सरकार डिजिटलीकरण की दिशा में प्रगति करना चाहती है लेकिन साथ ही देश में सुरक्षित साइबर माहौल सुनिश्चित करना चाहती है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण हर भारतीय को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है और डिजिटलीकरण के कारण सशक्तिकरण और तकनीकी प्रगति हुई है.

गृह मंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी के कारण देश में 130 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना का लाभ मिल रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘भारत जैसे देश के लिए, यह एक बड़ी क्रांति है. 2014 से पहले, हम इसके बारे में नहीं सोच सकते थे क्योंकि देश में 60 करोड़ परिवार ऐसे थे, जिनके पास कोई बैंक खाता नहीं था. डिजिटल रूप से लाभ अंतरित करने के बारे में भूल जाएं, उनके पास बैंक खाता तक नहीं था.’’ शाह ने कहा कि लाभ पाने के लिए लोगों को दर-दर भटकना पड़ता था और भ्रष्टाचार का भी सामना करना पड़ता था. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अब, एक बटन पर क्लिक करके प्रधानमंत्री 13 करोड़ परिवारों में से प्रत्येक को 6,000 रुपये अंतरित कर सकते हैं जो एक बड़ी प्रगति है और साथ ही एक चुनौती भी है.’’

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