पश्चिम बंगाल में भाजपा में अंदरूनी कलह बढ़ी, निशाने पर शाह की रणनीति और सुवेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल में भाजपा का बुरा हाल है। पार्टी के विभागों के प्रमुख तक परेशान और असमंजस के दौर में हैं। पार्टी की विधायक और प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा अग्निमित्रा पॉल जैसी नेताओं को समझ में नहीं आ रहा है कि वे क्या करें और क्या न करें? एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पॉल का फोन आता है, तो वह उन्हें भी कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं रहते। कहा जा रहा है कि सुवेंदु अधिकारी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने से भी भाजपा कार्यकर्ता बहुत नाराज हैं। हर दिन गाली-गलौच भरे फोन आ रहे हैं। लोग पूछते हैं कि भाजपा के पास नेता नहीं है जो भाड़े (सुवेंदु अधिकारी) पर नेता लाकर पार्टी काम चला रही है?

दिलीप घोष को पता ही नहीं है क्या हो रहा है?

पार्टी के पश्चिम बंगाल के एक विधायक ने बताया कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष इस समय काफी अपसेट हैं। उन्हें तो जैसे पता ही नहीं है कि क्या हो रहा है? वह बताते हैं कि जिस दिन सुवेंदु अधिकारी दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मिल रहे थे, तो उन्होंने दिलीप घोष को फोन किया। दिलीप दा ने बताया कि उन्हें सुवेंदु अधिकारी के दिल्ली जाने और नेताओं से मिलने की कोई जानकारी नहीं है। विधायक का कहना है कि ऐसा साफ लग रहा है कि बंगाल में भविष्य की भाजपा सुवेंदु अधिकारी ही चलाएंगे। वह बताते हैं कि हम पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। छात्र जीवन से पार्टी और इसकी विचारधारा से जुड़े हैं और यह सब गले के नीचे नहीं उतर रहा है।

नाराजगी मोदी से ज्यादा शाह से, नड्डा तो बस रबर स्टांप हैं पश्चिम बंगाल के नेता राज्य में पार्टी की दुर्दशा के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दोषी ठहराते हैं। वह कहते हैं कि बंगाल में भाजपा की सारी राजनीति का निर्धारण केंद्रीय गृहमंत्री ने ही किया। चुनाव के बाद अब न तो उनका बंगाल को लेकर बयान आ रहा है और न ही वह राज्य का दौरा कर रहे हैं। लोग भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को रबर स्टांप मानते हैं। पार्टी की नेता अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि इस पर वह कुछ नहीं बोलेंगी। लेकिन इतना जरूर है कि हमें फिलहाल कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

वह कहती हैं, हमारे कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा हो रही है। तमाम महिला कार्यकर्ता चुनाव बाद से ही हिंसा के डर से घर बार छोड़कर भाग गई हैं, उन्हें आर्थिक संसाधन सहयोग की जरूरत है। पॉल कहती हैं कि उनके पास फोन आते हैं, वह परेशान हैं, लेकिन वह (पॉल) उनकी बहुत मदद नहीं कर पा रही हैं। न ही उन्हें पता है कि आगे कैसे सबकुछ ठीक होगा। पॉल ने कहा कि वह केवल इतना कह सकती हैं कि आज उनके जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ कोई नहीं खड़ा है और वह बहुत असुरक्षित स्थिति में हैं। वह बताती हैं कि अपने कुछ निजी सहयोगियों के सहारे उन्होंने 80 महिला कार्यकर्ताओं को कुछ आर्थिक सहायता दी है, लेकिन आगे का उन्हें भी नहीं पता। कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

क्या भाजपा में भगदड़ मचेगी? अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि ऐसे सवाल का वह क्या जवाब दें? मेरे विचार में केंद्रीय नेतृत्व इस बारे में जरूर कुछ सोच रहे होंगे। वह कहती हैं कि उन्हें पता नहीं था कि भाजपा उपाध्यक्ष मुकुल रॉय अपने बेटे के साथ तृणमूल कांग्रेस में चले जाएंगे। लेकिन चले गए। कुछ और नेता भी ऐसा सोच रहे होंगे। इसी तरह से कुछ भाजपा के पुराने नेता भी राजनीतिक कामकाज में कोई खास दिलचस्पी लेते नहीं दिखाई दे रहे हैं। हो सकता है कि इसका एक कारण प्रदेश में पैदा हुआ असुरक्षा का माहौल भी हो। माल बिचौलिए खा गए और कार्यकर्ताओं को मिला ‘लड्डू’ भाजपा के एक और नेता की सुनिए। कूच बिहार क्षेत्र से हैं। उनका कहना है कि राज्य विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने पूरी जान लड़ा दी। राज्य में चुनाव प्रचार अभियान के लिए डंडा, झंडा, बैनर, पैसा, संसाधन पानी की तरह बहाया। लेकिन वह दावे के साथ कह सकते हैं कि जमीनी कार्यकर्ताओं को एक पाई तक नहीं मिली। सारा संसाधन बिचौलिए खा गए। जबकि चुनाव बाद तृणमूल के लोगों ने जमीनी कार्यकर्ताओं पर हिंसा की। इन्ही को घर बार छोड़कर भागना पड़ा। वह कहते हैं कि यही हाल रहा तो बंगाल में भाजपा को कार्यकर्ता मिलना मुश्किल हो जाएगा।

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