कामकाज के आधार पर चुनाव लड़ना और जीतना चाहते हैं, डरने का हमारा स्वभाव नहीं : शाह

नयी दिल्ली. गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि भाजपा अपनी विचारधारा, कार्यक्रमों, नेतृत्व की लोकप्रियता और सरकार के प्रदर्शन के आधार पर चुनाव लड़ना और जीतना चाहती है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि हम प्रतिद्वन्द्वी दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा करके सत्ता हासिल नहीं करना चाहते, यह हमारी संस्कृति नहीं है.

दिल्ली नगर निगम के चुनाव तत्काल नहीं कराने के पीछे हार का डर होने संबंधी विपक्षी सदस्यों के दावों पर शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में चार राज्यों में सरकार बनाई है, ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि हमें पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जहां भी चुनाव लड़ेंगे, वहां जीतेंगे.

लोकसभा में ‘दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022’ पर चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि कुछ सदस्यों का कहना था कि भाजपा हर जगह सत्ता में आना चाहती है, तो उनके लिये जवाब है कि ‘‘हम चाहते हैं कि सभी जगह हमारी सरकार बने और इसलिये तो चुनाव लड़ते हैं.’’ तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आप (राय) क्यों गोवा गए थे. अब त्रिपुरा क्यों जा रहे हैं. आपका यह अधिकार है, हर पार्टी को चुनाव में उतरना चाहिए. हम सभी जगह चुनाव लड़ना चाहते हैं और अपनी विचारधारा, कार्यक्रमों, नेतृत्व की लोकप्रियता और सरकार के प्रदर्शन के आधार पर जीतना चाहते हैं.’’

गृह मंत्री ने कहा कि सभी दलों को अपने कार्यक्रमों, विचारधारा, नेतृत्व की लोकप्रियता के आधार पर चुनाव लड़ने का अधिकार है, यह लोकतंत्र की खूबसूरती है और इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि आपत्ति केवल उन्हें हो सकती है जिन्हें सत्ता छिनने का डर हो .

शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘हम विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं की हत्या करके सत्ता हासिल नहीं करना चाहते, यह भाजपा की संस्कृति नहीं है.’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे दल यहां पर लोकतंत्र की बात कर रहे हैं. शाह ने कहा, ‘‘ परिवारों के आधार पर पार्टी चलाने वाले और अपने दलों के भीतर चुनाव नहीं करा पाने वाले भाजपा को लोकतंत्र की सीख नहीं दें. पहले अपने कार्यालय, अपनी पार्टी के भीतर चुनाव करा लें, फिर देश की ंिचता करें.’’ चुनाव से डरकर विधेयक लाने के कुछ विपक्षी सदस्यों के आरोप पर शाह ने कहा, ‘‘ हमारा स्वभाव डरने का नहीं है. चुनाव में हार-जीत हो सकती है. लेकिन चुनाव से क्यों डरना. ’’

उन्होंने कहा कि डर उसे कहते हैं जब देश में कांग्रेस के शासनकाल में आपातकाल लगाया गया था और सारे लोकतांत्रिक दलों के नेताओं को और लाखों लोगों को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया था. उन्होंने कहा कि अगर छह महीने बाद दिल्ली नगर निगम के चुनाव होंगे तो विपक्षी दल क्यों डर रहे हैं. वे आज ही चुनाव कराने की बात क्यों कर रहे हैं? शाह ने कहा, ‘‘ भारतीय जनता पार्टी के किसी कार्यकर्ता को डरने की जरूरत नहीं है. हमने चार राज्यों में सरकार बनाई है. आगे भी सभी चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जीत का भरोसा है.’’

शाह ने भाजपा के शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि ‘‘हम तो दो थे तब भी नहीं डरते थे, अब 302 हैं तब क्यों डरें.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अहंकार की कोई बात नहीं है. जनता का फैसला लोकतंत्र में सभी को स्वीकारना चाहिए. डर का सवाल नहीं है.’’ हाल के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने जितनी सीटों पर चुनाव लड़ा, उन सभी सीटों पर जमानत जब्त हो गई जबकि गोवा में उसने 39 सीटों पर चुनाव लड़ा और 35 पर जमानत जब्त हुई तथा उत्तराखंड में 70 में से 68 सीटों पर जमानत जब्त हो गई. उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा.

इन चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने इन राज्यों में 575 सीटों पर चुनाव लड़ा और 475 पर जमानत जब्त हो गई. शाह ने कहा, ‘‘ ऐसे में अब डरना किसको है ? हम तो पांच राज्यों में से चार राज्यों में चुनाव जीते.’’

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